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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय का इतिहयास

चाह नहीं मैं सुरबाला के,
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में,
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव,
पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जाएँ वीर अनेक।
भारत में अंग्रेजों की हुकूमत थी और आज़ादी के हजारों हजार परवाने ऐसी ही कविताओं को गुनगुना कर कुर्बान हो जाते थे । यह और ऐसी सैकड़ों कविताएं पंडित माखन लाल चतुर्वेदी ने लिखी थी जिनके एक एक शब्द से स्वतंत्रता सेनानियों का संकल्प हिमालय सा मजबूत हो जाता था । दद्दा माखन लाल चतुर्वेदी सिर्फ कवि नहीं थे बल्कि ऐसे पत्रकार भी थे जिनकी कलम से विचारों की अग्नि भी प्रवाहित होती थी । ऐसे ही महान 'एक भारतीय आत्मा' पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पुण्य स्मृति में बना है माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय । इसको एशिया का पहला पत्रकारिता विश्वविद्यालय होने का गौरव भी प्राप्त है । प्रख्यात पत्रकार एवं संपादक श्री जगदीश उपासने के नेतृत्व में देश में छह परिसरों, सैकड़ों संबद्ध संस्थानों , लाखों विद्यार्थ…

पैनल चर्चाएँ

पैनल चर्चाएँ पैनल चर्चा का आयोजन क्षेत्र विशेष घटना समसामयिक पहलू  के लिए की जाती है इसमें भेंटकर्ता एक पक्ष को लेकर अलग-अलग व्यक्तियों से चर्चा करता है अन्तर केवल इतना सा है कि भेंटवार्ता में वार्तालाप सवाल जवाब की शैली में होता है और पैनल चर्चा में सभी से केवल विषय केन्द्रित सवाल ही रख जाते है सभी भाग लेने वालों को एक ही दर्जा और महत्ता दी जाती है ऐसी वार्ता के अन्तर्गत अपने-अपने क्षेत्रों के प्रचंड विव्दान शामिल होते है पैनल चर्चा में भाग लेने वाले व्यक्ति एक ही पद के होते है और इनको कार्यक्रम निर्माता चुनता है           पैनल चर्चा के लिए ऐसे विषय को लिया जाता है जो चर्चित होते है जिसमें वाद- विवाद किया जा सकता है आज बहुत सारे चैनलों में पैनल चर्चा की जाती है जैसे चुनाव को लेकर, उसमें सभी पार्टी के प्रवक्ता होते है और वह अपनी पार्टी के बारे में बताते है  पैनल चर्चा में बहुत सारे विषय पर, पक्ष और विपक्ष होते है  यही इस चर्चा की विशेषता होती है

नशे मे डूबा युवा वर्ग

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नशे मे डूबा युवा वर्ग
आज हम एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जिसे हमारा युवा वर्ग बहुत ही प्रभावित हो रहा है, ना तो इस विषय पर सरकार का ध्यान है और ना जनता का और ना मीडिया का, परन्तु युवा वर्ग इसकी चपेट में बहुत हद तक आ चुका है “नशा” जो जिन्दगी के लिये हानिकारक है मैं अभी एक छात्रा हूँ और इस नशे के शिकार होते हुऐ युवा को देख रही हूँ
             हमारे आस-पास हमे ऐसे युवा नजर आ जाएगे। जो दिन रात नशा करते है परन्तु ना तो सरकार का ध्यान है और ना मीडिया का, आज एक बड़े पैमाने पर फैल रहा हैमैं रोज ऐसे युवा को देखती जो इसका सेवन करते है। और यह खेल खुले आम चल रहा है। परन्तु इस विषय पर कोई बात ही करने को तैयार नही। मुझे समझ नही आता की सरकार इस विषय पर कब सोचना शुरू करेगी। नोएडा के सैक्टर 62 में ये खुले आम चल रहा है। वहाँ कॉलेज की और ऑफिस की सख्या ज्यादा है और कॉलेज के सामने लगे ढ़बो की भी जो एक नशे को बढावा देता है में ये नही बोल रही सभी इस में शामिल है परन्तु कुछ है एसा मुझे शक है परन्तु ये सरकार और आम नागरिक की जिम्मेदारी बनती है की ऐसे कॉलेजो की पहचान करे और इस विषय के बारे में जानकारी दे। आने वाल…