मायावती ने अखिलेश यादव के सामने गठबंधन को लेकर रखी ये शर्त

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, ''जब से सपा-बसपा गठबंधन हुआ है तब से अखिलेश और डिंपल ने मुझे पूरे दिल से सम्मान दिया है. मैंने भी पुराने शिकवों को भुलाकर अपने बड़े होने के नाते परिवार की ही तरह सम्मान दिया.'' 

मायावती की कही अहम बातें

  • हमारे रिश्ते सिर्फ़ राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं बने हैं. ये रिश्ते हर सुख-दुख के मौक़े पर बने रहेंगे. लेकिन राजनीतिक मजबूरियों को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.
  • अभी लोकसभा चुनाव में जो नतीजे आए हैं, ऐसे में बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि सपा को यादव बहुल सीटों पर भी वोट नहीं मिले हैं. यादव बहुल सीटों पर सपा के मज़बूत उम्मीदवार भी हारे हैं.
  • कन्नौज में डिंपल और बदायूं धर्मेंद्र यादव का हारना हमें बहुत कुछ सोचने पर मज़बूर करता है. हालांकि बीते चुनावों में ईवीएम में गड़बड़ी किसी से छिपी नहीं है. फिर भी ये हार ऐसी नहीं होनी चाहिए. सपा में भीतरघात हुआ है.
  • ये हार हमें काफ़ी सोचने पर मज़बूर करता है. सोमवार को दिल्ली में हुई बैठक में चुनावी परिणामों की समीक्षा हुई.
  • जिस मक़सद से ये गठबंधन हुआ, उसमें सफ़लता नहीं मिली. सपा में भी कुछ सुधार लाने की ज़रूरत है.
  • अगर मझे लगेगा कि सपा प्रमुख अपने लोगों को एक साथ ला पाए तो हम लोग ज़रूर आगे साथ चलेंगे. अगर अखिलेश इसमें सफल नहीं हो पाते हैं तो हमारा अकेले चलना ही ठीक है.
  • सपा के साथ ये ब्रेक स्थायी नहीं है, ये अस्थायी है.

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