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शेर आया, शेर आया....

शेर आया, शेर आया.... सत्ता के शे में चूर, होकर भरपूर कर रहे नासमझी संविधान के साथ फूल बतमीजी सूरज कभी न कभी डूबता है पिछलों का डूब...