माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय का इतिहयास


चाह नहीं मैं सुरबाला के,
गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में,
बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव,
पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ!
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जाएँ वीर अनेक।
 भारत में अंग्रेजों की हुकूमत थी और आज़ादी के हजारों हजार परवाने ऐसी ही कविताओं को गुनगुना कर कुर्बान हो जाते थे । यह और ऐसी सैकड़ों कविताएं पंडित माखन लाल चतुर्वेदी ने लिखी थी जिनके एक एक शब्द से स्वतंत्रता सेनानियों का संकल्प हिमालय सा मजबूत हो जाता था । दद्दा माखन लाल चतुर्वेदी सिर्फ कवि नहीं थे बल्कि ऐसे पत्रकार भी थे जिनकी कलम से विचारों की अग्नि भी प्रवाहित होती थी । ऐसे ही महान 'एक भारतीय आत्मा' पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पुण्य स्मृति में बना है माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय । इसको एशिया का पहला पत्रकारिता विश्वविद्यालय होने का गौरव भी प्राप्त है । प्रख्यात पत्रकार एवं संपादक श्री जगदीश उपासने के नेतृत्व में देश में छह परिसरों, सैकड़ों संबद्ध संस्थानों , लाखों विद्यार्थियों और मीडिया के विभिन्न आयामों के शिक्षण- प्रशिक्षण की क्षमता वाला यह विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है ।  
 इस विश्वविद्यालय की नींव 1991 में भोपाल में रखी गई थी लेकिन इस की योजना 1989 में प्रारंभ हुई । यह वर्ष माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म शताब्दी वर्ष के नाम से मनाया जा रहा था और इसके आयोजन के लिए एक जन्म शताब्दी समारोह समिति का गठन किया गया था । इसी समिति के आग्रह पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने से माखन लाल चतुर्वेदी जी के स्मृति में एक पत्रकारिता शिक्षण संस्थान बनाने की घोषणा की । सरकार की सहमति के बाद उस समय जनसत्ता के संपादक श्री प्रभाष जोशी, प्रेस इंस्टिस्यूट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री अजीत भट्टाचार्य तथा जाने-माने संविधान विशेषज्ञ और पेशे से वकील श्री एम. एल. सिंघवी को इस संस्थान का खाका बनाने का कार्य सौंपा गया... इन महानुभावों द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट को ही कुछ संशोधनों के साथ 1990 में मध्यप्रदेश विधानसभा एक्ट के रूप में पारित किया गया जिसके तहत इस संस्थान की स्थापना हुई ।
 डॉ. राधेश्याम शर्मा , वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व महानिदेशक , मा.च.रा.प.सं.विवि
 इस विश्वविद्यालय की कल्पना के पीछे एक और रोचक कहानी है । वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर अपने एक लेख में बताते हैं, कि 16 जनवरी 1965 को मध्य प्रदेश शासन द्वारा खंडवा में एक भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी के नागरिक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था । तत्कालीन राज्यपाल श्री हरि विनायक और मुख्यमंत्री पंडित द्वारिका प्रसाद खुद उनके घर पहुँचे थे, और चरणो में नतमस्तक होते हुए पहला वाक्य कहा था, कि - " आज सत्ता साहित्य के श्री चरणों में नतमस्तक है " । इसी आयोजन के दौरान ही दद्दा माखनलाल ने  अपनी कल्पना को सबके सामने रखते हुए कहा था, कि हमारे देश में एक हिन्दी पत्रकारिता का विश्वविद्यालय होना चाहिए...
दद्दा माखनलाल तो अपने विचार को सरकार और सक्षम लोगों के समक्ष रखकर करीब तीन वर्ष बाद 1968 में इस संसार से विदा हो गए किंतु उनकी जन्मशती पर यानि 1989 में उनके इस सपने को साकार करने का प्रयास प्रारंभ हुआ ।
 श्री अच्युतानंद मिश्र , वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व कुलपति , मा.च.रा.प.सं.विवि
 16 जनवरी 1991 को यह स्वप्न यथार्थ बन चुका था जब तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने इसका विधिवत उद्घाटन किया... डॉ. शर्मा ही इसके प्रथम विजिटर भी थे ।  प्रारंभ में यह विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता संस्थान के नाम से जाना जाता था और सरकार ने इसे भवन निर्माण हेतु जमीन के अलावा 1 करोड़ रुपए तथा 25 लाख प्रतिवर्ष अनुदान देने का प्रावधान  किया था ...दो कमरों में अध्यापन से प्रारंभ हुआ यह संस्थान अब छह परिसर एवं सैकड़ों संबद्ध संथानों वाले विश्वविद्यालय के रूप में विस्तार ले चुका है ।
 श्री राधेश्याम शर्मा
  बिना किसी बुनियादी सुविधा के पत्रकारिता जैसे व्यापक क्षेत्र में शिक्षण संस्थान को खड़ा करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी । इसीलिए प्रारंभ में इस संस्थान की बागडोर किसके हाथों में सौंपी जाए यह एक बड़ा जटिल प्रश्न था । एक लम्बे विमर्श के बाद श्री राधेश्याम शर्मा जी का नाम सामने आया । श्री शर्मा उस समय चंडीगढ़ में दैनिक ट्रिब्यून समाचार पत्र के संपादक थे। जब राधेश्याम शर्मा जी के पास इस संस्थान का महानिदेशक बनने का प्रस्ताव भेजा गया तो उन्होने तमाम विपरीत परिस्थितियों और असुविधाओं के बावजूद एक बड़े लक्ष्य की पूर्ति के लिए स्वयं को प्रस्तुत कर दिया ।
 श्री राधेश्याम शर्मा  
 जुलाई 1991 से इस संस्थान में अध्ययन अध्यापन का कार्य शुरु हुआ और पहले पाठ्यक्रम के रूप में एक साल का पत्रकारिता का एवं जनसम्पर्क का बैचलर डिप्लोमा कोर्स शुरु किया गया । भोपाल शहर के 74 बंग्ले स्थित एक भवन से इस विश्वविद्यालय की शुरूआत हुई.... और फिर राज्य सहकारी समिति ट्रेनिंग सेंटर के हॉस्टल में पहला सत्र  शुरु किया गया... जिसमे  पत्रकारिता और जनसंर्पक के बीजे. और बीपीआर की शुरुआत की गई।
 
BJ ( bachelor of journalism) 1 वर्ष
BPR ( bachelor of  public  relation)
 1992 में बैचलर ऑफ लाइब्रेरी और इनफारमेशन साइंस की स्नातक की पढ़ाई शुरू हुई। और अगले वर्ष ही 1993 में पत्रकारिता, जनसंपर्क और पुस्तकालय विज्ञान में स्नातकोत्तर का कोर्स शुरु किया गया।
जुलाई 1992 में BACHELOR OF LIBRARY AND INFORMATION SCIENCE   1993 में तीनों विभागों से पीजी डिप्लोमा कोर्स
 अगले 5 वर्षों में संस्थान ने ने मीडिय़ा में कम्प्यूटर के प्रयोग को बड़े स्तर पर सम्मिलित किया । यहां पर डीटीपी सहित पीजी डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन की भी शुरुआत की गई... चूंकि इस विश्वविद्यालय को संस्थान के रूप में शुरु किया गया था और अब इसमें अध्ययन केवल पत्रकारिता पर ही केंद्रित ना रहकर कम्प्यूटर व अन्य विषयों में भी प्रारंभ हो चुका था , इसीलिए इसके अधीनियम में आमूल-चूल परिवर्तन किए गए.. इसका नाम माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एंव संचार विश्वविद्यालय और महानिदेशक के स्थान पर कुलपति का पद सृजित किया गया.. साथ ही कुलाधिसचिव यानि रेक्टर का पद भी सृजित किया गया... जो शिक्षक प्रांरभ से ही इस विश्वविद्यालय से जुड़े ख्याति प्राप्त वरिष्ठ प्रोफेसर श्री नन्द किशेर त्रिखा जी, कमल दीक्षित जी, तथा डाँ बी.एस निगम जी प्रमुख थे। बाद में जैसे – जैसे विषय बढे अनेक विद्वान विश्वविद्यालय जुडते चले गए । अंतिम महानिदेशक तथा प्रथम कुलपति के रुप में श्री नवभारत टाइम्स के संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार श्री अच्चुतानंद मिश्र विश्वविद्यालय से जुड़े ।
 श्री अच्युतानंद मिश्र
 श्री मिश्र के दो कार्यकाल कुलपति रहने के बाद आईआईएमसी, गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में वरिष्ठ जिम्मेदारियां निभा चुके प्रो. बी के कुठियाला जी को कुलपति नियुक्त किया गया । श्री कुठियाला ने पूर्व कुलपति श्री अच्युतानंद द्वारा शुरु किए गए विश्वविद्यालय विस्तार के कार्य को अद्भुत गति प्रदान की । संस्थान से विश्वविद्यालय बनने के बाद से ही इसके नए परिसरों की स्थापना प्रारंभ हुई । इस क्रम में पहला विस्तारित परिसर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानि एनसीआर के नोएडा में 11 सितंबर 2000 में शुरू हुआ । इसके बाद दूसरा खंडवा में, तीसरा ग्वालियर में, चौथा अमरकंटक और पांचवा रीवा में स्थापित हुए । विश्वविद्यालय के विस्तार को अपने नव-प्रयोगों से प्रो. बी के कुठियाला ने नवीन आयाम दिया ।
 प्रो. बी के कुठियाला , पूर्व कुलपति . मा.च.रा.प.सं.विवि.
 2016 -17 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय का रजत जयंती वर्ष था । पच्चीस वर्षों से अधिक की इस यात्रा में विश्वविद्यालय ने अनेक पड़ाव देखे हैं । सीमित संसाधनों के साथ किसी एक विषय के अध्ययन का संस्थान बनाना और फिर उसे  विश्वविद्यालय में तब्दील करना निश्चय ही एक संकल्प, समर्पण एवं दैवीय कृपा के कारण ही संभव हो पाया है । विश्वविद्यालय के सबसे पुराने शिक्षकों में से एक प्रो. बी एस निगम इस सफर के अनुभवों को कुछ यूं याद करते हैं ।
 प्रो. बी एस निगम
 मीडिया या संचार - संवाद से संबधित ऐसा कोई विषय नहीं है जिसके शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में न हो....  उदाहरण के तौर पर बीए जनसंचार, बीबीए इ-कॉमर्स, एमजे, एमए (जनसंचार ) एमएससी (इलेक्ट्रोनिक मीडिया ) एमएससी (फिल्म प्रोडक्शन ) एमएससी (मीडि़या शोध ), एमएससी (न्यू मीडिया ) एमबीए (मीडिया प्रबंधन ) मल्टीमीडिया, एनिमेशन, पैकैजिगं, साइबर सिक्योरिटी,  फिल्म मेकिगं, प्रोग्राम प्रोडक्शन, पीजीडीसीए, आदि कोर्स यहां उपलब्ध हैं । मीडिया शिक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने निरंतर प्रतिमान स्थापित किए हैं और भविष्य की नई चुनौतियों के लिए पूरी तरह से तैयार है । 
प्रो. संजय द्विवेद्धि , कुलसचिव
पच्चीस से अधिक वर्षों से इस विश्वविद्यालय से हजारों विद्यार्थी शिक्षित – प्रशिक्षित होकर निकले हैं और देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाते आ रहे हैं । देश की सबसे प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी के खेल संपादक की जिम्मेदारी निभा रहे धर्मेश पंत हों, इंडियन एक्सप्रेस के कार्यकारी संपादक श्यामलाल यादव या फिर दैनिक भास्कर के संपादक आनंद पांडे । मीडिया के विभिन्न क्षेत्रों में और पत्रकारिता के आसमान चमकने वाले अधिकांश सितारों की पहचान माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जुड़ी है ।     
 धर्मेश पंत , खेल संपादक , पीटीआई
 महज मीडिया की विभिन्न विधाओं में ही नहीं बल्कि मीडिया शिक्षण में भी इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी आज पूरे देश में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं । प्रो. संजय द्विवेद्धी, प्रो. अरुण कुमार भगत , डॉ. पवित्र श्रीवास्तव जैसे अनेक नाम हैं जो आज मीडिया शिक्षण के क्षेत्र में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं । पहले विद्यार्थी और फिर शिक्षक के रूप में विश्वविद्यालय से जुड़े अपने अनुभव को सहेज कर ये विद्वान पत्रकारिता के लिए नए होनहारों को तैयार कर रहे हैं ।
 प्रो. अरुण कुमार भगत , प्रभारी , नोएडा परिसर
 नियमित शिक्षण प्रशिक्षण कार्यों के अतिरिक्त विश्वविद्यालय मीडिया से जुड़े विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन करता रहा है । विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष में देश के विभिन्न हिस्सों में भी विशेष कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया । विद्यार्थियों की अकादमिक क्षमताओं के अतिरिक्त उनकी अन्य रचनात्मक प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रतिवर्ष प्रतिभानामक आयोजन किया जाता है । यही नहीं विद्यार्थियों को अकादमिक विषयों से अलग पत्रकारिता का व्यवहारिक ज्ञान करवाने के लिए सप्ताह में प्रत्येक शनिवार को सार्थक शनिवार के रूप में आयोजित किया जाता है । इसमें पत्रकारिता और मीडिया जगत से जुड़े अनुभवी, विख्यात एवं विद्वत जन अपने अनुभवों के आधार पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं ।
 श्रीमती रजनी नागपाल, सह प्रभारी , नोएडा परिसर
 वर्तमान में UGC ने विश्वविद्यालय को धारा-12 बी के अंतर्गत मान्यता दी है जो  विद्यार्थियों, शिक्षकों और खासकर शोधकर्ता के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा । वक्त के साथ मीडिया लगातार बदल रहा है ऐसे में मीडिया का शिक्षण का सबसे बड़ा एवं श्रेष्ठ संस्थान होने के नाते माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय पर भी महती जिम्मेदारी होगी । तीन दशक से अधिक जनसत्ता और इंडिया टुडे जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पत्रकार और संपादक की जिम्मेदारी निभा चुके श्री उपासने की अगुआई में विश्वविद्यालय यह दायित्व निभाने के लिए पूरी तरह से सक्षम और तैयार है । इस महान और पुनीत कार्य में दद्दा माखन लाल चतुर्वेदी की प्रेरणा सदैव मार्ग प्रशस्त करेगी ।   

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