नशे मे डूबा युवा वर्ग

नशे मे डूबा युवा वर्ग

आज हम एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जिसे हमारा युवा वर्ग बहुत ही प्रभावित हो रहा है, ना तो इस विषय पर सरकार का ध्यान है और ना जनता का और ना मीडिया का, परन्तु युवा वर्ग इसकी चपेट में बहुत हद तक आ चुका है नशा जो जिन्दगी के लिये हानिकारक है मैं अभी एक छात्रा हूँ और इस नशे के शिकार होते हुऐ युवा को देख रही हूँ

             हमारे आस-पास हमे ऐसे युवा नजर आ जाएगे। जो दिन रात नशा करते है परन्तु ना तो सरकार का ध्यान है और ना मीडिया का, आज एक बड़े पैमाने पर फैल रहा है  मैं रोज ऐसे युवा को देखती जो इसका सेवन करते है। और यह खेल खुले आम चल रहा है। परन्तु इस विषय पर कोई बात ही करने को तैयार नही। मुझे समझ नही आता की सरकार इस विषय पर कब सोचना शुरू करेगी। नोएडा के सैक्टर 62 में ये खुले आम चल रहा है। वहाँ कॉलेज की और ऑफिस की सख्या ज्यादा है और कॉलेज के सामने लगे ढ़बो की भी जो एक नशे को बढावा देता है में ये नही बोल रही सभी इस में शामिल है परन्तु कुछ है एसा मुझे शक है परन्तु ये सरकार और आम नागरिक की जिम्मेदारी बनती है की ऐसे कॉलेजो की पहचान करे और इस विषय के बारे में जानकारी दे। आने वाले समय में यह बहुत बड़ी समस्या बन कर उभरेगी। फिर शायद हम इस से लड़ नही पायगे। अभी हमारे पास मौका है हमारे युवा वर्ग को बचाने का, जो शायद कल ना हो।


           यह एक ऐसी बुराई है,जिसमें इंसान का जीवन समय से पहले नष्ट हो
 जाता है नशे के लिये समाज में शरब, गंजा भांग,बीड़ी,सिगरेट,तम्बाकु आदि का 
प्रयोग हो रहा है। इस व्यक्ति को मानसिक हानि पहुंचने के साथ ही समाजिक वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है एसे व्यक्ति अपराध की और ज्यादा अग्रसर होते है. नशा अब अन्तराष्ट्री समस्या बन गयी है। समाज में पनप रहे विभिन्न प्रकर के अपराधों का एक कारण नशा भी है नशे के कारण अपराधों की संख्या में ज्यादा वृध्दि देखने को मिल रही है किसी भी देश का विकास उसके नागरिकों के स्वास्थ्य से जुडा होता है,यदि मानव स्वास्थ्य ही खराब होगा.तो उस देश का विकास कैसा होगा, आप इस बात से समझ सकते है नशा एक ऐसी बुरी लत है। जो इंसान को अन्दर से खोखला बना देती है।

       समाज में तमाम नकारात्मक विषय पर सरकार और सामाजिक सँगठन बहुत जोर शोर से आवाज़ उठाते है, कुछ एक मामलों में तो आन्दोलन तक हो जाते है। परन्तु नशे से जुड़े मामलों को ना तो राजनीतिक दल गम्भीरता से लेते है,और ना सामाजिक संगठन,तो इस विषय पर बात कौन करेंगा। समाज के कुछ जागरूक व जिम्मेवार व्यक्ति स्थानीय स्तर पर कुछ प्रयास जरूर करते है, परन्तु जड़ से मिटाने के लिये कभी पूर्ण समर्थ नही मिल पाता है। ऐसे लोगों पर समाज के दखल का कोई असर नही होता, क्योकि लोगों के समझाने पर वह एक ही जुमले का प्रयोग करते है आपने पैसे की पीते है किसी के बाप के पैसो की नही।

     मेरा तो सरकार से अनुरोध है कि पूरे भारत मे पूर्ण शराब बन्दी और तमाम तरह के नशे बेचने पर क्यो? रोक नही लगाती। मुझे समझ नही आता जिस वस्तु से हमारा समाज दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है. उसे क्यों हम पूर्णप्रतिब्ध नही करती।
       नशा नाश की जड़ है। इसे दूर रहने में ही भलाई है।
                                       

                                             ऋतू चौहान

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